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शुक्रवार, 12 अप्रैल 2024

गज़ल

 

तू है बादल

तो,बरसा..जल

 

नींव में देखा

मीलों दलदल

 

एक शून्य को

कितनी हलचल

 

नन्ही बिटिया

नदिया कलकल

 

ज़ोर से चीखो

निकलेगा हल

 

नाम ही माँ का

है गँगाजल

 

तेरी यादें

महकेँ हरपल

 

औऱ पुकारो

टूटे साँकल

 

-लक्ष्मी शंकर वाजपेयी 

रविवार, 15 अक्टूबर 2023

गज़ल

 

सागर   तो   इतराते    हैं।

पोखर  प्यास  बुझाते  हैं।

 

कोई  याद  करे  तो  हम

दौड़े   -  दौड़े  आते   हैं।

 

मैं   आते   में  मिलता  हूँ

लोग  जिधर भी जाते  हैं।

 

छूने भर  से  पत्थर-लोग

फूलों-से   हो   जाते   हैं।

 

पैदा  होना  नाम  का   है

लोग  तभी  मर  जाते  हैं।

 

दुनिया से  अपने  दिल में

कितने  लोग  आ पाते हैं?

 

जिनको   आना  होता  है

अब तक तो आ जाते  हैं!

 

जो  ख़ुद  अपने  दुश्मन हैं

वो   किससे   टकराते   हैं?

 

'मीत'  तुम्हारे  जैसे  लोग

जल्दी  ही  मर   जाते  हैं।


- मन मीत