तू है बादल
तो,बरसा..जल
नींव में देखा
मीलों दलदल
एक शून्य को
कितनी हलचल
नन्ही बिटिया
नदिया कलकल
ज़ोर से चीखो
निकलेगा हल
नाम ही माँ का
है गँगाजल
तेरी यादें
महकेँ हरपल
औऱ पुकारो
टूटे साँकल
-लक्ष्मी शंकर वाजपेयी
तू है बादल
तो,बरसा..जल
नींव में देखा
मीलों दलदल
एक शून्य को
कितनी हलचल
नन्ही बिटिया
नदिया कलकल
ज़ोर से चीखो
निकलेगा हल
नाम ही माँ का
है गँगाजल
तेरी यादें
महकेँ हरपल
औऱ पुकारो
टूटे साँकल
-लक्ष्मी शंकर वाजपेयी
सागर तो इतराते
हैं।
पोखर प्यास बुझाते
हैं।
कोई याद करे
तो हम
दौड़े - दौड़े
आते हैं।
मैं आते में
मिलता हूँ
लोग जिधर भी जाते हैं।
छूने भर से पत्थर-लोग
फूलों-से हो जाते
हैं।
पैदा होना नाम
का है
लोग तभी मर
जाते हैं।
दुनिया से अपने दिल में
कितने लोग आ पाते हैं?
जिनको आना होता
है
अब तक तो आ जाते हैं!
जो ख़ुद अपने
दुश्मन हैं
वो किससे टकराते
हैं?
'मीत' तुम्हारे
जैसे लोग
जल्दी ही मर
जाते हैं।
- मन मीत