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मंगलवार, 19 मार्च 2024

प्रेम

प्रेम समय के साथ बदलता है

प्रेम अपनी जगह बदलता देता है

प्रेम अपनी त्वचा  बदलता है

परंतु प्रेम होना समाप्त नहीं होता

प्रेम खाल और मांस के बीच भ्रमण करता है

हृदय तक आती धमनियों में रक्त प्रवाह की तरह

प्रेम  लय को बदल देता है

औचित्य को बदल देता है

बदलता है जीवन ,फिर बदलती है आदत

आदत जिसमें दुःख की छाया होती है

बिछड़े हुए प्रेमिल की समयावधि बताती है

हमारा आंतरिक मन अतिअनुरागी

वसंत के साथ नहीं रह सकता

मुझे जब भी तुम पर प्रेम आया

अटूट आया

मैं महसूसती हूँ प्रेम आग्रह की

औपचारिकता से कोसों दूर है

नदी के किनारे सुनसान सड़कों पर चलने से

तुम तक नहीं आया जा सकता

मेरे शहर की नदी तुम्हारे शहर तक नहीं जाती

प्रेम फिर समय के साथ बदलता है

यह अपनी त्वचा बदलता है,

लय को बदलता है

लेकिन प्रेम का अंत नहीं होता है

प्रेम खाल और मांस के बीच भ्रमण करता है

प्रेम अक्सर रुप बदलकर आता है

किसी दूसरे समय में लौटकर।

     - ज्योति शर्मा 

शनिवार, 2 दिसंबर 2023

प्रेम

 हर समय सोचते रहना किसी के विषय में ,

प्रेम है तो वह तुम ही से है

ढूँढना हर जगह प्रेम है,

तो वह तुम ही से है।

हर बात बताने की इच्छा,

हर समय बात करने की इच्छा,

किसी से होना प्रेम है,

तो वह भी तुम ही से है।

प्रतीक्षा उत्तर की करना,

चिंता और ध्यान रखना,

राह देखना संदेश की प्रेम है,

तो वह तुम्हीं से हैl

और कैसा होता है प्रेम ,

मैने कभी जाना नहीं,

और किसी को,

इतना निकट पाया नहीं।

अश्रु भी और मुस्कान भी,

आ जाते हैं तुम्हारी याद से।

पहले कभी ऐसा हुआ नहीं,

इतना किसी के विषय में सोचा नहीं।

कौन सा नाम दूँ इस भाव को,

तुम्हें बताना है पर अभी बताया नहीं।

सोचता हूँ कह दूँगा तुमसे,

तुम्हीं बताना क्या है और क्या कहें इसे।

 

-अमिताभ शुक्ल